
OC - आदत
तेरी यादों की दिल में हिफ़ाज़त सी हो गई है,
कि हर धड़कन को तुझसे मोहब्बत सी हो गई है।
लत नहीं मुझे वैसे और किसी चीज़ की,
तेरी न जाने क्यों आदत सी हो गई है।
ख़ुदा की बंदगी यूँ तो दस्तूर में न थी,
अब हर साँस तेरी इबादत सी हो गई है।
नींद-चैन सब छीन गया है आने से तेरे,
महबूबा मेरी किसी आफ़त सी हो गई है।
मरता हूँ तुझ पे तो फ़ख्र महसूस होता है,
क़ुर्बानी ये मेरी किसी शहादत सी हो गई है।