
ye video dekhate hue mere man me ek sawal h ! jo me niche hindi me post kar rha hu .
source : https://www.youtube.com/watch?v=i2TP2d1Midw
एक जीव सबसे पहले अपने भोजन का इंतजाम करता है, और अगर उसे वही नहीं मिला तो उसके लिए वह कुछ भी करेगा। और अगर जब भोजन मिल जाए तो वह कुछ ज्ञान की तलाश होगी और वह तब होगी जब वह ज्ञान उसने कभी देखा ही हो, अगर हमेशा झूठ ही झूठ देखा हो तो शायद कभी उसको सच्चाई की तलाश हो, जैसे बुद्ध ने जब तक मृत्यु को नहीं देखा तब तक उन्होंने सत्य की तलाश की नहीं।
और यह सब मनुष्य की समझ / विवेक पर भी निर्भर करता है। जिसने कभी भर पेट भोजन से ज्यादा कुछ सोचा ही न हो उसका विवेक भी क्या होगा।
यह यात्रा लंबी भी है, इस यात्रा की लकीर लंबी होने में बहुत समय लगेगा शायद पीढ़ियां लग जाएं...
और जब मनुष्य 1 से 2 और 2 से 4 होता है तो यह कहना आसान नहीं कि वही चेतन मन ही 1 से 2 होगा, यह भी हो सकता है या हो रहा है कि अवचेतन मन ज्यादा 2 से 4 हो रहे हैं, और जब अच्छाई से जल्दी बुराई बड़ी हो रही हो तो अच्छाई का जीतना नामुमकिन सा हो जाएगा!!