u/Antique_Joke1711

Image 1 — We should be discussing more hindi literature here। Book review 📖 Sara Aakash - Rajendra Yadav | सारा आकाश - राजेन्द्र यादव
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We should be discussing more hindi literature here। Book review 📖 Sara Aakash - Rajendra Yadav | सारा आकाश - राजेन्द्र यादव

कुछ दो हफ़्ते हो चुके मुझे ये किताब पढ़े.... आज ये लिख रहा हूं।

यह कहानी मेरे मानने में सिर्फ़ समर(mc) की नहीं है बल्कि हर उस urban middle class युवक की है जो घर की जिम्मेदारियों और societal pressure के बोझ तले धीरे-धीरे अपने सपनों और इच्छाओं का बलिदान करता चला जाता है ताकि वो परिवार की अपेक्षाओं पर खरा उतर सके।

कोशिश करूंगा राजेंद्र यादव के इस यथार्थवादी, thought-provoking उपन्यास का एक सहज review लिखने की....

📝

उपन्यास एक middle class आदमी की अंतहीन भागदौड़ की कहानी है, और traditional households में बहुओं के साथ होने वाले (दुर)व्यवहार का आईना है।

Plot -

  • समर ने अभी अपने इंटर के exams दिए हैं और उनके परिणाम आने बाकी हैं के इसी बीच घरवाले उसकी शादी तय कर देते हैं। जबकि समर की इच्छा ब्याह की बिल्कुल न थी, अभी वह पढ़ना चाहता है, जीवन में कुछ हासिल करना चाहता है। वह इस शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं था, उसे इस समय ये जिम्मेदारियाँ नहीं चाहिए थीं।
  • आगे प्रभा का उससे, उनकी सुहागरात में, अच्छा सत्कार न करना, और उससे पहले आकर न बोलना (basically उसके "आदर्श पत्नी" वाले expectations न meet करना) आग में घी हो जाता है, समर को चोट पहुंचाता है, जिस वजह से वो आहत और अहंकार में प्रभा से महीनों नहीं बोलता। उसका अपनी पत्नी की ओर कठोर व्यवहार बढ़ता चला जाता है।

घरवालों का कमाने का दबाव एक ओर, और दूसरी ओर समर की पढ़ाई और अपने सपनों को बचाए रखने की जद्दोजहद.... इन परिस्थितियों से जूझते रहने की उसकी कोशिश मुझे उसके किरदार की सबसे अच्छी बात लगती है।

उपन्यास की सबसे खूबसूरत बात यही है कि समर स्थिर नहीं रहता, उसका character development पूरी कहानी में बेहद स्वाभाविक तरीके से उभरता है।

समर और प्रभा के बीच प्यार जो उमड़ आता है, प्रभा का लगातार समर के प्रति supportive बने रहना, और दोनों का घर-परिवार से दूर अपनी स्वतंत्र जीवन जीने की कल्पना करना - यह सब बातें मुझे बेहद सुंदर लगी।

मेरे मानने में कहानी का भाग-२ और भी अधिक गहरा और गंभीर है।

कहानी का अंत, जो कि मूल रूप से शामिल नहीं किया गया है... और जोकि "प्रेत बोलते हैं" (उपन्यास का असल नाम) में शामिल था वो बहुत ही करुण और विचलित कर देने वाला है।

जिनको हिंदी literature पसंद है उन्हें नो डाउट ये उपन्यास बहुत पसंद आएगा। अगर आप को मेरी तरह reality, socially grounded, 'दुखड़ा' पढ़ना पसंद है तो आप बिल्कुल इसे पढ़ सकते हैं।

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u/Antique_Joke1711 — 21 hours ago