u/Still-Philosophy-680

My first review

My first review

बेशक, बहुत ही सुंदर लिखाई है विनोद कुमार शुक्ल की। मेरे दृष्टिकोण में, जैसे मैंने पहले लोगों के review पढ़े थे, तो सबसे ज़्यादा मैंने यही पढ़ा था कि बड़ी ही सरल भाषा है, सामान्य कहानी है — जो कि है भी। पर मेरा नजरिया यह भी है कि विनोद कुमार शुक्ल की बहुत-सी बातें बड़े मनोवैज्ञानिक स्तर पर लिखी हुई हैं। और मेरी नज़रिए में उनकी ये भी एक कला है — जीवित और निर्जीव चीज़ों में भी जान डाल देने की।

बाकी, reading is all about reading between the line ।

u/Still-Philosophy-680 — 6 days ago