Any 'The Boys' lover here
दो न्याय अगर तो आधा दो,
पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच सुप्स
रक्खो अपनी 'वॉट' तमाम।
हम 'बॉयज़' चुप बैठ जायेंगे,
द सेवन पर असि न उठायेंगे!
होमलैंडर वह भी दे ना सका,
सच्चा अनुराग ब्वॉयज की ले न सका,
उलटे, बुचर को मिटाने चला,
जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश सूप्स पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है।
बुचर ने भीषण हुंकार किया,
कम्पाउंड-V से स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग 'सेवन' डोले,
बुचर कुपित होकर बोले-
‘लेज़र बढ़ा कर साध मुझे,
हाँ, हाँ होमलैंडर! बाँध मुझे।
यह देख, वॉट मुझमें लय है,
यह देख, संताप मुझमें लय है,
मुझमें विलीन प्रतिशोध सकल,
मुझमें लय है यह द ब्वायज सकल।
अहंकार फूलता है मुझमें,
संहार झूलता है मुझमें।
ह्यूई-फ्रेन्ची मेरा दीप्त भाल,
मदर्स मिल्क वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं,
किमिको-स्टारलाइट पग मेरे हैं।
दिपते जो कृत्रिम तेज निकर,
सब हैं मेरे इस क्रोध के अन्दर।
दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख,
मुझमें सारा विज्ञान-ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर शाला, कपट-अक्षर,
नश्वर ये देव, मनुष्य अमर।
शत कोटि मिथ्या, शत कोटि व्यूज़,
शत कोटि भ्रमित जन, विकृत न्यूज़।
‘शत कोटि वेग, शत कोटि महाबल,
शत कोटि छद्म-वीर, योद्धा विकल,
शत कोटि दण्डधर, छद्म-काल,
शत कोटि मुकुटधारी लोकपाल।
लेजर बढ़ाकर साध इन्हें,
हाँ-हाँ होमलैंडर! बाँध इन्हें।
अट्टालिका, अतल, पाताल देख,
गत और अनागत काल देख,
यह देख द वॉट का आदि-सृजन,
यह देख, वॉट टावर का रण,
लाशों से पटी हुई मेदिनी है,
पहचान, इसमें कहाँ तेरी ये वज्र-रश्मि है।
~ कलम रंगदार