u/Conflicts-in-me

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निगला हुआ दर्द।

उसे भी दर्द हुआ था,

आँखों में आँसू भर, वो

दौड़ा अपनी माँ के पास,

माँ रोती-रोती बोली तू तो

मेरा राजा बेटा है,

तू क्यूँ रोता है?

वो समझा शायद पिता उसका

दर्द समझे

वो झिंझोड़ कर बोले -

"लड़के हो, आँसू पोछो",

दीदी-भैया ने भी मज़ाक बनाया

बोले- "लड़कियों-सा रोता है",

मैं समझा यह मेरा काम नहीं,

मैंने आँसू पोछे,

गले में जो कुछ भारी-सा

अटका था,

उसे अंदर निगल गया।

और उसी दिन से मैं "मर्द"

बन गया।

अब दर्द नहीं होता,

अब मैं नहीं रोता,

पर, क्या सच में दर्द नहीं होता?

क्या सच में, मैं नहीं रोता?

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u/Conflicts-in-me — 21 hours ago