Hilljatra ( हिलजात्रा ) - The Legendary Mask Festival Of Kumaon.
पहाड़ों में लोकपर्व धार्मिक आस्था और संस्कृति का पर्याय माने जाते है । इन में से कुछ ऐसे पर्व भी है जो खुद में खास महत्व लिए हुए हैं । सोरघाटी पिथौरागढ़ में मनाए जाने वाला एक ऐसा ही ऐतिहासिक लोकपर्व है हिलजात्रा, जो शायद ही कही और देखने को मिलता है और इसे खास बनाते हैं इस पर्व में इस्तेमाल होने वाले मुखौटे, इन मुखौटों का इतिहास बहुत ही पुराना है । जिसे नेपाल के राजा ने पिथौरागढ़ के कुमौड़ गांव में रहने वाले चार महर भाईयों को उनकी वीरता के प्रतीक के रूप में भेंट किये थे । ये मुखौटे महर भाईयों की वीरता के साथ ही सोरघाटी पिथौरागढ़ की सुख समृद्धि का प्रतीक भी माने जाते हैं , इन मुखौटों में बड़े और छोटे बैल, लखिया भूत और हिरन के मुखौटे शामिल है , लखिया भूत मुख्य मुखौटा है कुमौड गांव की हिलजात्रा का जो की भारी आकर्षण का केंद्र भी है । हिलजात्रा पर्व के दिन इन मुखौटों को पहनकर पात्र लोगों को पहाड़ के कृषि प्रेम से रूबरू कराते हैं । इस पर्व में पात्रों का रोमांचित करने वाला अभिनय दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है ।