राम नाम 🙏🏻
I just posted simple ram naam mahatmya as a sadhna that requires no rule and one of the top commenters of this sub got so offended . This much offended that warned me to do Abhichara through my photo and DOB.
श्री रामचरितमानस (तुलसीदास जी)
करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं हरीहि तजहिं जग धंदा॥
राम नाम जपे जाहिं निरंतर। तिन कहुँ नहिं कछु भय भयअंतर॥
अर्थ: जो निरंतर प्रभु राम के नाम का जप करते हैं, उन्हें संसार में (या किसी भी लोक में) किसी भी प्रकार का कोई डर या भय नहीं रह जाता।
नाम प्रगाढ़ अनेक अनर्था। अमित नाम जपे मिटहिं संवर्ता॥
राम नाम जन जे अनुरागी। तिन्ह कहुँ सिद्ध सब संकट त्यागी॥
उलटा नामु जपत जगु जाना। बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना॥
कौतुकहूं मिटहिं घोर अघाना। राम नाम महिमा श्रुति गाना॥
पद्म पुराण ( पाताल खण्ड )
डाकिनी शाकिनी भूतवैतालाद्याश्च राक्षसाः।
पलायन्ते विदूरेण रामनामानुकीर्तनात्॥
अर्थ: राम नाम का संकीर्तन (या निरंतर जप) करने से डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, वैताल और दुष्ट राक्षस बहुत दूर भाग जाते हैं। वे आसपास भटकने की हिम्मत भी नहीं कर सकते।
न तां वशं न चोद्वेगं न च मरणतामपि।
लभन्ते मानवाः क्लेशं येषां हृदि स्थितो हरिः (रामः)॥
अर्थ: जिनके हृदय में राम नाम की रट लगी है, उन्हें न तो कोई वश में कर सकता है (मोहन/वशीकरण), न कोई उद्वेग (उच्चाटन) दे सकता है, और न ही मारण प्रयोग (अभिचार) उनका कुछ बिगाड़ सकता है।
रामनाम्ना कृतं वर्म यो बिभर्ति कलेवरे।
तस्य न स्यात्कुतो बाधा भूतप्रेतादिभिः क्वचित्॥
अर्थ: जो मनुष्य अपने शरीर और चेतना पर राम नाम रूपी कवच धारण कर लेता है, उसे भूत, प्रेत, पिशाच या किसी भी तांत्रिक अभिचार से कभी भी, कहीं भी बाधा नहीं पहुंच सकती।
सर्वोपद्रवनाशाय सर्वकल्याणहेतवे।
रामनाम्नो परं नास्ति सत्यं सत्यं वदाम्यहम्॥
अर्थ: भगवान शिव कहते हैं कि हे पार्वती! मैं पूरी तरह सत्य कह रहा हूँ कि सभी प्रकार के उपद्रवों (चाहे वे कृत्य, अभिचार, या तांत्रिक उपद्रव हों) को नष्ट करने के लिए और सर्व-कल्याण के लिए "राम" नाम से बढ़कर संसार में कोई दूसरा उपाय नहीं है।
ये कुर्वन्ति नराः क्रूराः क्रियाः मारणकर्मणि।
तेषां नाशो भवेच्छीघ्रं रामनामप्रभावतः॥
अर्थ: जो क्रूर मनुष्य किसी राम-भक्त पर मारण या अभिचार जैसी तांत्रिक क्रियाएं करते हैं, राम नाम के प्रभाव से (उस भक्त का तो कुछ नहीं बिगड़ता) बल्कि उन कुकर्म करने वालों का स्वयं ही बहुत शीघ्र नाश हो जाता है।
वाल्मीकि रामायण (सुन्दरकाण्ड)
न विप्रकारं लभते स महात्मा कृतांजलिः।
रामनामानुरक्तो हि रक्षोभिरपि दुर्जयः॥
अर्थ: जो महात्मा एकाग्र होकर राम नाम में अनुरक्त (लीन) है, उसका कोई अपकार (अहित) नहीं कर सकता। वह राक्षसों और उनकी तामसिक माया के लिए भी अजेय (दुर्जय) हो जाता है।
पातलाभूतलव्योम-चारिणश्छद्मचारिणः।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः॥ (श्लोक १२)
अर्थ: जो मनुष्य राम नाम द्वारा सुरक्षित है (जिसके चारों ओर राम नाम का कवच है), उसे पाताल, पृथ्वी और आकाश में घूमने वाले अथवा छद्म भेष में घूमने वाले (अदृश्य शक्तियां, तांत्रिक ऊर्जाएं, भूत-प्रेत आदि) देख तक नहीं सकते, नुकसान पहुंचाना तो बहुत दूर की बात है।
स्कन्द पुराण (काशी खण्ड)
अभिचारक्रियाः सर्वाः कृत्याश्चैव सुदारुणाः।
भस्मीभवन्ति ताः शीघ्रं रामनामहुताशने॥
अर्थ: जितनी भी अभिचार क्रियाएं (तंत्र प्रयोग) हैं और जितनी भी दारुण 'कृत्या' (तांत्रिकों द्वारा भेजी जाने वाली संहारक ऊर्जा या देवी) हैं, वे राम नाम रूपी अग्नि (हुताशन) में पड़ते ही तुरंत भस्म हो जाती हैं।
बृहद् विष्णुपुराण
न कुतूहलमात्रादपि यस्य नाम्नि संस्पर्शः।
तस्याभिचारिकाः क्रूराः न प्रभवन्ति कदाचन॥
अर्थ: यदि कौतूहलवश (मजाक में या बिना पूरी श्रद्धा के भी) किसी ने राम नाम का आश्रय ले लिया है, तो क्रूर आभिचारिक प्रयोग (तांत्रिक मारण आदि) उस पर कभी भी अपना प्रभाव नहीं दिखा सकते। जो श्रद्धापूर्वक चौबीस घंटे जप रहा है, उसकी तो बात ही अलग है।
जय श्री राम 🙏🏻