I need a poem review...my first work...
I was teasing my friend with a girl in my class. She is good, and we never spoke to her. I once had a dream of both playing together. He didn't mind me teasing him...
Once, I said that I'll write a poem on him... So I wrote this and gave it to him, but he started to link me to her...
I hate it, but this poem was my pure work, no ai nothing.
I just want an honest opinion...
I
मान के बैठा था मैं प्यार को,
एक दर्द भरी दुख दुविधा है।
पर जब देखा तुझे तो प्रतीत हुआ कि,
हे राम, ये तो आ नंदा है।
II
हलचल करें तुम्हारी आंखियां,
तेरी यादों में मैं खो जाऊं।
मन तो चाहता है नंदा,
तेरे साथ में मिल जाऊं।
III
संसार नामक इस सागर में,
दुख दर्द से डूबा था,
आशा बनके आई तुम तो,
प्यार तो तुझसे होना था।
IV
मन भर में तेरी यादें,
मन सुने तो तेरी बातें,
मंत्रमुग्ध तो तेरे सपने,
नंदा जानो तुम मेरे अपने...
V
विष्णु के संग लक्ष्मी जैसा,
वैसे ही तुम नंदा।
कह दो मुझसे प्यार है तुझमें,
हे राम, तू है आ नंदा.
VI
नंदा आनंदा तू है चंदा,
तेरी प्रेम पाणि मैं चाहता हूं।
तेरी स्पर्श मात्र से उठ जाऊंगा,
जब लड़ लड़के मर जाऊं।