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Navratri Special Handmade Mata Rani Outfit By My Mom
My Mom Made This Navratri Special Durga Maa Idol Costume Completely By Hand. She has been making these at home for a while, and I thought why not share her work this festive season. Every piece takes a lot of time, patience and effort to make. I’d also love to hear your honest thoughts on this.
॥ शनिवार के पावन दिन, जय श्री शनिदेव महाराज की जय ॥ 🪔🔱
Auspicious saturday with an image of shree shanidev 🙏
Shanishchri Amawasya 🍃🪔🍃🫸🏻🫷🏻Mahalaya 🌺🪔🌺🫸🏻🫷🏻
Today is a very auspicious day..
Shanishchri Amawasya 🪔🪔🌷🌷
Sarva pitru amavasya 🪔🪔🌹🌹
And ..
Mahalaya... Shubh mahalya 🪔🪔🌺🌺
All are very important... Dedicated to our ancestors, our karma .. our dharma... Our moral.. and matru bhakti 🌹🪔🌹🫸🏻🤲🏻🫷🏻
Durga Puja
Is Kolkata's durga puja worth the hype?
Navratra pratham Divas : Maa Shailaputri devyo namah 🌺🌺🪔🌺🌺💯🤲🏻🍃🍃🍃🍃🍃
North
All directions
🎉🪔 नवरात्रि में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप की पूजा माँ शैलपुत्री के रूप में की जाती है। लेकिन उनके स्वरूप में कुछ ऐसी बातें छिपी हैं, जिन्हें केवल पूजा-विधि तक सीमित न रखकर समझना चाहिए।
🍃 शैलपुत्री का अर्थ क्या है?
‘शैल’ का अर्थ है पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ है बेटी। इसलिए शैलपुत्री का शाब्दिक अर्थ है पर्वतराज की पुत्री। पुराणों की परंपरा में वे हिमवान की पुत्री पार्वती हैं। उनका नाम हमें प्रकृति, पर्वत और जीवन के आधार से जोड़ता है।
🍃सती और पार्वती का संबंध
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ शैलपुत्री को देवी सती के पुनर्जन्म में हिमालय के घर जन्मी पार्वती के रूप में समझा जाता है। सती के रूप में उन्होंने दक्ष के यज्ञ में देह त्यागी थी। बाद में उन्होंने पार्वती के रूप में जन्म लेकर भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त किया। यह कथा देवी के पुनर्जन्म और अटूट संकल्प का प्रतीक है।
🍃वृषभ पर सवार होने का रहस्य
माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल होता है। वृषभ को धर्म, धैर्य और स्थिरता के प्रतीक के रूप में समझा जाता है। कमल पवित्रता का और त्रिशूल शक्ति का संकेत देता है। इस प्रकार उनका स्वरूप शक्ति और संतुलन का सुंदर समन्वय है।
जय अम्बे माँ! 🌺🌺
🌺ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।🌺
✨ध्यान प्रार्थना✨
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥🌹🌹
माँ शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि ऊँचा उठने से पहले अपनी नींव मजबूत करना आवश्यक है। जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, पर्वत जैसी दृढ़ता, कमल जैसी पवित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने का साहस बनाए रखना ही उनकी उपासना का एक गहरा भावार्थ है।
🫸🏻🫷🏻जय माँ शैलपुत्री! जय माँ दुर्गा!
माँ जगदम्बा की कृपा सब पर बनी रहे। जीवन में श्रद्धा की दृढ़ता, मन में शांति और कर्मों में शक्ति बनी रहे।
माँ के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। 🤲🏻🙏🏻🙏🏻🌺🌺🫸🏻🫷🏻🫸🏻🫷🏻
1st Navratri: Invoking Goddess Shailputri
On the first day of Navratri, devotees honor Goddess Shailputri, the embodiment of purity, strength, and nature. Representing divine power and stability, she blesses her followers with courage and peace. The auspicious ritual of Ghatasthapana is performed on this day, marking the vibrant beginning of nine holy nights of devotion.
Mahakaleshwar Jyotirlinga Morning Darsham 🌞🙏
Sarv pitru Amavsya 🌷🪔🌹🤲🏻✨✨🫸🏻🫷🏻
North
South
हे अर्जुन! जो भक्त श्रद्धापूर्वक अन्य देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, वे भी अप्रत्यक्ष रूप से मेरी ही पूजा करते हैं (क्योंकि सभी देवताओं के अंतरात्मा नारायण ही हैं)। समस्त यज्ञों और पूजाओं का मूल भोक्ता और स्वामी मैं ही हूँ।
🪔कर्मकांड और नित्य पूजा के मंत्र
सनातन धर्म के नित्य पूजा-पाठ और संध्या-वंदन के अंत में शास्त्रीय विधान के अनुसार यह प्रसिद्ध श्लोक बोला जाता है:
आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्।
सर्वदेवनमस्कारः केशवं प्रति गच्छति॥
जिस प्रकार आकाश से गिरा हुआ जल (वर्षा का पानी) घूम-फिरकर अंततः समुद्र में ही जाकर मिलता है, उसी प्रकार किसी भी देवी-देवता को किया गया नमस्कार अंततः भगवान केशव (नारायण) को ही प्राप्त होता है।
इसी तरह पूजा समाप्ति पर संकल्प छोड़ा जाता है:
'अनेन कृतपूजनेन श्री परमेश्वर/श्रीमन्नारायणः प्रीयताम् न मम।'
(इस पूजा से श्रीहरि नारायण प्रसन्न हों।)
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इमेज courtesy .. owner with thanks 🙏🏻