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Manav Aur Sankat Poem in Hindi
This is the poem I have written. And also, I have copyright of it. Please guys share your feedback. I am a new writer. I write poems and stories in Hindi. I published it on pratilipi app.
Mulaqaat (poem in Ghazal style hindi)
I tried writing poem in hindustani Ghazal style. It's my first time writing something in hindi. I reaserched a bit about advance words in Urdu and how to portray feelings.
Give me a review of possible and rate it out of 10 please.
KAVITA (Poem in hindi)
कविता क्या है?
वृक्षों के पर्णों का वायु में लहराना, या पक्षियों का स्वतंत्र गगन में चहचहाना।
मोर का खुले पंखों संग थिरकना, या प्रियतमा का यूँ खिल के मुस्कुराना।
सूर्योदय की स्वर्णिम किरणें, या चंद्रमा का अलौकिक सौंदर्य?
सरस्वती की वीणा का सुर, या नटराज का तांडव-नृत्य?
क्या कविता केवल मानव मस्तिष्क तक सीमित है,
या प्रकृति में मिश्रित एक पावन वरदान है?
और मेरे लिए...
कविता इस जीवन की सबसे मधुर मिठास है,
जो हर निशब्द भावना को दे दे वाणी, वही पावन अहसास है।
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Day 2 of being consistent. Not good with words but trying.
Rate it out of 10 . And a genuine review would help❤️✨
ये ऋण उतार कर जाऊँगा
ये ऋण उतार कर जाऊँगा
ये मायूसी से भरे वर्ष,
प्रतिदिन बढ़ता संघर्ष,
ये लुप्त हुआ सा हर्ष।
जीवन मेरा जो व्यंग बना,
निज पतन है जिसका अंग बना।
इस बुझते हुए से सूरज को
मैं अग्नि अवश्य लगाऊँगा।
ये ऋण उतार कर जाऊँगा।
ये स्नेह-प्रेम से वंचित मन,
स्वजनों से कटा हुआ जीवन।
ये स्वाद-रहित विष-सा भोजन,
क्यों दिया मुझे यूँ जाता है?
गर है विधाता हर नर में,
जब हूँ अर्जुन समरांगण में,
करता कर्म में हर क्षण में,
फिर भी मुझे हराया जाता है।
है दयावान वो पालक तो,
अपने कर्मठ इस बालक को,
मेरे रथ के चालक को
क्यों शल्य बनाया जाता है?
अब नहीं चाहिए भीख कोई,
अब युद्ध चले तो चलने दो।
मुझे अभिमन्यु को छलने दो,
लाक्षागृह को जलने दो,
पांचाली के वस्त्र उतारने दो।
जो रक्त बचा है बह जाए,
धरती ये सूनी रह जाए।
जीवित से इन शवों की
मैं शय्या आज सजाऊँगा।
ये ऋण उतार कर जाऊँगा।
— अभिजीत (Me)