
नसीब
मैं मर जाऊँ, और तुझे मेरा जनाज़ा भी नसीब न हो, तू देर से पहुँचे और मेरे हिस्से की मिट्टी भी तेरे हाथों में न आए शायद तब समझ आए कि किसी को खोना सिर्फ़ उसके चले जाने का नाम नहीं होता।
मैंने तुझे इतना चाहा था कि तेरे बाद खुद को चाहना ही भूल गई। तूने बस मेरा हाथ छोड़ा था, मैंने अपनी पूरी दुनिया खो दी और तुझे शायद ख़बर भी नहीं हुई कि तेरे जाने के बाद मैं कितनी ख़ामोशी से टूटती रही।
अब अगर कभी मेरी याद आए, तो रो लेना मगर मुझे पुकारना मत। क्योंकि जिस लड़की ने ज़िंदगी भर तेरा इंतज़ार किया, वो शायद उस वक़्त तक इतनी दूर जा चुकी होगी कि तेरी आवाज़ भी उस तक नहीं पहुँच पाएगी।