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Looking for Mains written Aspirants

Hey bros. I am looking for someone who has written upsc cse mains once or more anyone who is willing can DM😊

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u/Philospicalpoet5318 — 11 days ago
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Philosophy book suggestions

Suggest me any philosopher's book similar to Shankaracharya's philosophy or there can be fully opposite philosopher also

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u/Philospicalpoet5318 — 11 days ago

मैं और समाज

समाज का हु पर समाज से नहीं हु

समाज से हु पर समाज में नहीं हु

समाज में हु पर समाज का नहीं

समाजमय हु पर समाज मैं नहीं हूं

तो कौन हू मैं और कौन चाहता है जानना मुझे

समाज या मैं

यदि मैं हु समाज तो तुम कौन हो कवि जो चाहते हो मुझे ढूंढना

अगर तुम हो मैं तो चले हो किसे खोजने

क्या समाज से नहीं हो तुम आते

यदि मैं को चाहते हो खोजना पहले अपना परिचय तो बतलाओ

यदि अपना परिचय पा गए तो चले हो तुम फिर किसे ढूंढने

यदि नहीं जानते अपने को तो क्या कैसे क्यों कौन किसके लिए जी रहे थे इस जगत में

बताओ कौन हो तुम

क्या तुम वो शोषित नारी हो जो कुचली जा रही है हर रंगमंच पर

या वे अंधे नर हो जो विषय भोग की राइफल टांगे घूम रहा है ढीला ढाला दबा हुआ चौराहे पर जो चाहता है सिर्फ नारी को प्रभावित करना और दबे हुए का शोषण करके रॉब जमाना

या तुम हो उच्च गिरे हुए कुर्ताधारी जो सांत्वना देते हो अपना को कि किए है मैने अनेकों नेक कार्य यदि चला गया मैं तो कौन बचाएगा इन्हें

कुछ तो ढील देनी पड़ती है भईया वरना क्या होगा इनका यदि मैं चला गया

खुद को पहचानने में भी सक्षम हृदय अब अपने हृदय से कुछ छल कर जाते है और कहते है मैं हु तुम्हारा रक्षक और धर्मरक्षक कहलाते है

बताओ कौन हो तुम ......

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u/Philospicalpoet5318 — 13 days ago
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मैं और समाज

समाज का हु पर समाज से नहीं हु

समाज से हु पर समाज में नहीं हु

समाज में हु पर समाज का नहीं

समाजमय हु पर समाज मैं नहीं हूं

तो कौन हू मैं और कौन चाहता है जानना मुझे

समाज या मैं

यदि मैं हु समाज तो तुम कौन हो कवि जो चाहते हो मुझे ढूंढना

अगर तुम हो मैं तो चले हो किसे खोजने

क्या समाज से नहीं हो तुम आते

यदि मैं को चाहते हो खोजना पहले अपना परिचय तो बतलाओ

यदि अपना परिचय पा गए तो चले हो तुम फिर किसे ढूंढने

यदि नहीं जानते अपने को तो क्या कैसे क्यों कौन किसके लिए जी रहे थे इस जगत में

बताओ कौन हो तुम

क्या तुम वो शोषित नारी हो जो कुचली जा रही है हर रंगमंच पर

या वे अंधे नर हो जो विषय भोग की राइफल टांगे घूम रहा है ढीला ढाला दबा हुआ चौराहे पर जो चाहता है सिर्फ नारी को प्रभावित करना और दबे हुए का शोषण करके रॉब जमाना

या तुम हो उच्च गिरे हुए कुर्ताधारी जो सांत्वना देते हो अपना को कि किए है मैने अनेकों नेक कार्य यदि चला गया मैं तो कौन बचाएगा इन्हें

कुछ तो ढील देनी पड़ती है भईया वरना क्या होगा इनका यदि मैं चला गया

खुद को पहचानने में भी सक्षम हृदय अब अपने हृदय से कुछ छल कर जाते है और कहते है मैं हु तुम्हारा रक्षक और धर्मरक्षक कहलाते है

बताओ कौन हो तुम ......

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u/Philospicalpoet5318 — 13 days ago