नागपंचमी की सभी ओशो प्रेमी, मित्रो तथा नव संन्यासियों को शुभकामनाएं! 🐍
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नागपंचमी की सभी ओशो प्रेमी, मित्रो तथा नव संन्यासियों को शुभकामनाएं! 🐍

🫂 ओशो मैत्री समर्पण (OMS) 🫂

u/swbodhpramado — 4 days ago
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🍃 श्रावणमास के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं! 🍃

🍃🍃🍃 शिवलिंग रहस्य 🍃🍃🍃

शिवलिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिमा पृथ्वी पर कभी नहीं खोजी गई। उसमें आपकी आत्मा का पूरा आकार छिपा है। और आपकी आत्मा की ऊर्जा एक वर्तुल में घूम सकती है, यह भी छिपा है। और जिस दिन आपकी ऊर्जा आपके ही भीतर घूमती है और आपमें ही लीन हो जाती है, उस दिन शक्ति भी नहीं खोती और आनंद भी उपलब्ध होता है। फिर जितनी ज्यादा शक्ति संगृहीत होती जाती है, उतना आनंद बढ़ता जाता है। और जल्दी ही एक घड़ी आ जाती है, जब आप बिना कुछ खोए, बिना कुछ दिए, बिना कुछ लगाए दांव पर, आनंद को पाते हैं।

अकारण आनंद जिस दिन मिलने लगता है--और यह जो अकारण आनंद की दशा है, इसको सच्चिदानंद कहा है--पूरे अस्तित्व के साथ संभोग शुरू हो जाता है। होना ही संभोग का रूप हो जाता है। आपका होना, श्वास लेना भी संभोग का स्वरूप हो जाता है। भीतर श्वास गई और आनंद से भर जाता है। बाहर श्वास गई और आनंद से भर जाता है। फिर आनंद के लिए कुछ विशेष आयोजन नहीं करने होते। जो भी हो रहा है, वही आनंद हो जाता है। धूप में बैठे हैं और सूरज की किरणें चेहरे पर पड़ रही हैं, तो वहां भी आनंद हो जाता है। और आनंद संभोग जैसा हो जाता है। सभी आनंद का स्वभाव संभोग जैसा है।

– ओशो

नहिं राम बिन ठांव

प्रवचन - १२

शिवलिंगः परमभोग का आस्वाद

🫂 संकलन: ओशो मैत्री समर्पण (OMS) 🫂

ऑनलाइन ओशो ध्यान विधियों से जुड़ने के लिए तथा ऑनलाइन नव संन्यास दीक्षा के लिए व्हाट्सएप करे: 08830239288

u/swbodhpramado — 4 days ago
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Good Night all beloved friends and Happy Source full grace of Master of Masters always..! 🤗

u/swbodhpramado — 4 days ago
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नहीं सोर्स बिन ठाव! ✍🏼 इस महाअभियान से जुड़े और सदगुरु ओशो की धरोहर को सही अर्थों में संजोए रखे। 🙏🏼

u/swbodhpramado — 4 days ago
▲ 2 r/Osho

👩🏻‍💻8 दिवसीय ऑनलाइन 🧑🏻‍💻 🧘🏻‍♀️ ओशो श्रवण ध्यान शिविर 🧘🏻‍♂️ 🏠 जो घर बारे आपना 🔥

🫂 ओशो मैत्री समर्पण प्रस्तुत 🫂

संकल्प, होश और ध्यान इन कुंजियों से खोले रहस्यमई जीवन के द्वार! 🗝️

संचालन: सदगुरु ओशो 🙇🏻‍♀️

सदगुरु ओशो के आशीष में पाए गहन ध्यान और मौन की अनुभूति 😌

तारीख: 1 से 8 सितंबर 2026 तक 🗓️

समय: सुबह 7 से 8 AM ⏰

सहयोग राशि: स्वेच्छा अनुसार

(Paytm: 8830239288)

ऑनलाइन शिविर में सम्मिलित होने के लिए रेजिस्ट्रेशन करे व्हाट्सएप द्वारा: +918830239288

u/swbodhpramado — 5 days ago
▲ 5 r/Osho

Nahi Source Bin Thaav (A campaign to preserve the precious treasure of OshO as it is by mentioning and forwarding always authentic Source with His every content) Join with Joy this campaign to Enjoy and Enrich with grace of Master of Masters! 🙏🏼

u/swbodhpramado — 5 days ago
▲ 1 r/Osho

🇮🇳 बीमार आजादी 🇮🇳 | 🫣 Yet to be Happy Independence Day 🫣

आजादी की लड़ाई में कई तरह की भ्रांतियां पैदा की हैं। एक तो भ्रांति यह पैदा की कि आजादी की लड़ाई में हमें ऐसे सपने दिखाए जो झूठे, मिसाल के तौर पर ऐसा हमारे मन में आजादी के संघर्ष के दिनों के नेताओं ने यह भाव पैदा किया, जैसे अंग्रेज की गुलामी ही सब बीमारियों का कारण है। अंग्रेज गया कि सब बीमारियां गईं। सब बीमारियों का कारण अंग्रेज हैं। तो अंग्रेज गया कि बीमारियां गईं। फिर जैसे हमें कुछ और करना नहीं है। एक काम हमने कर लिया कि अंग्रेज चला गया, तो बात खत्म हो गई, क्योंकि बीमारी उसकी वजह से थी। लेकिन यह बात झूठ है। सच बात तो यह है कि हमारी बीमारियों की वजह से अंग्रेज था। हमारी बीमारियां ज्यादा डीप रोटेड थी, अंग्रेज बहुत बाद में आया। तो अंग्रेज हमारी बीमारियों का कारण नहीं था, बल्कि हमारी बीमारियां ही अंग्रेज के हिंदुस्तान में रहने के लिए कारण थी। तो अंग्रेज तो चला गया और बीमारियां वहीं की वहीं हैं। न केवल वहीं की वहीं हैं, बल्कि अंग्रेज ने दो सौ साल तक उन बीमारियों से कई तरह से लड़ने की भी कोशिश की, वह लड़ाई भी बंद हो गई। और अंग्रेज ने एक बुनियादी भूल की थी उस लड़ाई में, वह अंग्रेज के पक्ष में नहीं थी, हमारे पक्ष में थी कि अंग्रेज ने हमें पहली बार हमारा जो पूर्वई कुआं था। उसके बाहर हमें निकाल कर बाहर खड़ा कर दिया। एक हमारा मन था क्लोज्ड, उसके सब तरफ से दरवाजे तोड़ दिए। मेरी अपनी समझ में, अगर अंग्रेज भारत को पाश्चात्य ढंग की शिक्षा न देते, तो भारत अनंतकाल तक गुलाम रह सकता था। क्योंकि जैसे ही उन्होंने पश्चिमी ढंग की शिक्षा दी, हमारे मन में पश्चिमी मूल पहली दफा जाग्रत हुआ। स्वतंत्रता, लोकतंत्र यह सारी की सारी मूल भावनाएं हम पश्चिम से लाए हैं।..

दूसरी बात, पश्चिम की शिक्षा ने पहली दफा, हिन्दुस्तान का जो बंद दिमाग था, उसके बाहर भी दुनिया है, उसका ख्याल दिया। अंग्रेजी के माध्यम से हम पहली दफा सारी दुनिया से संबंधित हुए। इस संबंध ने पहली दफा तुलना पैदा की। और हमें पता लगा कि हम कहां खड़े हैं? और साथ ही पश्चिम की समृद्धि, पश्चिम का लोकतंत्र, उसको जब देखकर हमारे बच्चे लौटे हैं, स्वभावतः उनके मन में ख्याल उठा कि यहां भी यह सब होना चाहिए। मजे की बात यह है अंग्रेजों से हिन्दुस्तान नहीं लड़ रहा था। अंग्रेजों से अंग्रेजों के पढ़ाए हुए लड़के ही लड़ रहे थे। पूरा हिन्दुस्तान लड़ाई लड़ा भी नहीं है आजादी की। सिर्फ अंग्रेजी शिक्षित वर्ग अंग्रेजों से लड़ा है। पश्चिम के साथ हमारा जो संबंध था, जिसने हमें सबल भी किया, स्वतंत्रता का बोध भी दिया, एक राजनीतिक चेतना की थोड़ी झलक भी दी। आजादी के बाद वो भी खो गई।

आजादी के बाद फिर हमने अपने पूरे के भीतर बंद होने की कोशिश की। उसको कोई भारतीयकरण कहे, उसके कुछ और नाम दे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, या नाम न भी दे, फिर भी हम अपने गड्ढे में वापिस पहुंचने की कोशिश की हैं। अंग्रेजी को भी बाहर निकालो, पाश्चात्य शिक्षा को भी बाहर निकालो, पश्चिमी ढंग भी मत जियो, पश्चिमी ढंग के कपड़े भी मत पहनो। हमने धीरे-धीरे, फिर से अपने पूरे को मजबूत किया है और अपनी दीवालें मजबूत की हैं। इसकी वजह से ये बीस वर्ष हमारी चेतना के विकास के वर्ष नहीं हो सके।

भारत का जो नेतृत्व है, और जो राजनैतिक दल हैं, इन सबकी मनोस्थिति भी, मुझे चर्चिल का एक वक्तव्य ख्याल में है कि पंद्रह अगस्त, उन्नीस सौ सैंतालीस को आजादी के बाद चर्चिल ने एक वक्तव्य दिया, और उसने कहा कि आजादी आप दे रहे हैं, लेकिन हिंदुस्तान बीस साल के बाद वहीं होगा, जहां से मुगलों से हमने लिया था। इतना वापिस खड़ा हो जाएगा अपनी जगह पर। इतने खंड होंगे, इतना उपद्रव, इतना झगड़ा और कन्फ्यूजन होगा। चर्चिल की भविष्यवाणी सही होती मालूम पड़ रही है। और ऐसा नहीं लगता कि आजादी मिलने से हमने कोई विकास किया है, बल्कि ऐसा लगता है कि किन्हीं मामलों में हम पतित हुए हैं, जैसे, आजादी के पहले कम से कम गुलामी के कारण ही सही भारत के जीवन में एक तरह का अनुशासन था। आजाद होकर वो अनुशासन सब नष्ट हुआ। यानि हमें ऐसा लगा क्योंकि हम स्वतंत्र हो गए हैं, इसलिए सड़क पर ट्रैफिक के नियम भी मानने की कोई जरूरत नहीं है।

मैंने सुना है कि रूस में जब पहली दफा क्रांति हुई तो क्रांति के बाद एक बूढ़ी औरत बीच सड़क पे चल रही थी। और एक ट्रैफिक के आदमी ने कहा कि तू कहां चल रही है? तो उसने कहा कि अब हम स्वतंत्र हैं। अब कोई नियम लागू नहीं होता। अब वो गए जार के दिन जबकि बाएं या दाएं चलना पड़ता था। करीब-करीब हमारे मन पर ऐसा हुआ कि गुलामी की वजह से जो-जो रोग हमारे दबे थे, और प्रकट नहीं हो पाते थे, वह सब-के-सब रोग एक साथ प्रकट हो गए। स्वतंत्रता ने अंग्रेजों को तो हटाया, हमारी एक बीमारी नहीं हटाई, बल्कि हमारी सब दबी हुई बीमारियों को उभारने का काम... । सारी बीमारियां उभर के खड़ी हो गईं। तो भारत के नेताओं ने जो भरोसा दिया था कि अंग्रेज अकेली बीमारी हैं, और उसके हटने से सब ठीक हो जाएगा। वो गलत सिद्ध हुआ। गलत था। और हमारी सारी बीमारियां जो सदा से थी हमारे भीतर, वो वापिस अपनी जगह प्रकट होकर खड़ी हो गईं।

– ओशो

नये भारत का जन्म

प्रवचन - ११

मेरा भरोसा व्यक्ति पर है

🫂 संकलन: ओशो मैत्री समर्पण (OMS) 🫂

ऑनलाइन ओशो ध्यान विधियों से जुड़ने के लिए तथा ऑनलाइन नव संन्यास दीक्षा के लिए व्हाट्सएप करे: 08830239288

u/swbodhpramado — 5 days ago
▲ 4 r/Osho

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! 🇮🇳 🫂 ओशो मैत्री समर्पण (OMS) 🫂

u/swbodhpramado — 6 days ago
▲ 3 r/Osho

📿 नव संन्यास - तिरस्कार नही; समग्र जीवन स्वीकार 📿

मैं मौलिक रूपांतरण की बात कर रहा हूं। और सिर्फ बात ही नहीं कर रहा हूं, उस नए आदमी को पैदा करने की चेष्टा में लगा हूं। यह कोई शास्त्रार्थ नहीं है जो मैं चला रहा हूं। शास्त्रार्थ में मेरा रस नहीं है। मैं तो नया आदमी पैदा करने में लगा हूं। वही सबूत होगा, वही गवाह होगा कि मैं जो कहता हूं वह हो सकता है या नहीं? क्या एक ऐसा व्यक्ति पैदा किया जा सकता है, जो हिंदू न हो, मुसलमान न हो, ईसाई न हो, भारतीय न हो, पाकिस्तानी न हो, जापानी न हो, चीनी न हो?...किया जा सकता है! उसी का प्रयोग चल रहा है।

मेरा संन्यासी विश्व का नागरिक है। उसकी कोई और राष्ट्रीय मान्यता नहीं है। उसका कोई चर्च नहीं है, कोई संप्रदाय नहीं है। वह समस्त चर्चों और संप्रदायों से मुक्त व्यक्ति है।

और मेरा संन्यासी जीवन को दंड नहीं मानता है, अनुग्रह मानता है। और मेरा संन्यासी आवागमन से मुक्त नहीं हो जाना चाहता है।

मेरा संन्यासी अपनी कोई चाह नहीं रखता है; परमात्मा जैसे जिलाए उसमें राजी है--जो उसकी मर्जी!

और मेरा संन्यासी जीवन के किन्हीं भी अंगों का तिरस्कार नहीं करता है। मेरा संन्यासी जीवन की समग्रता को स्वीकार करता है और समग्रता को जीने की चेष्टा करता है। मेरा संन्यासी चेष्टा में संलग्न है कि उसके भीतर कोई भी अंग निषिद्ध न हो। क्योंकि जो भी अंग हम निषिद्ध करते हैं, वह अंग बदला लेता है। अगर कामवासना का निषेध करोगे तो कामवासना बदला लेगी; तुम्हारे चित्त को कामवासना ही कामवासना से भर देगी। अगर तुम क्रोध को दबाओगे तो तुम्हारे भीतर क्रोध रोएं-रोएं में समा जाएगा। अगर तुम शरीर का दमन करोगे तो तुम यह मत सोचना कि तुम आत्मवादी हो जाओगे; तुमसे ज्यादा शरीरवादी खोजना मुश्किल हो जाएगा। अगर तुम बाहर के जगत को इनकार करके हिमालय की गुफा में भाग जाना चाहोगे, तो हिमालय की गुफा में बैठकर भी तुम बाहर के जगत का ही चिंतन-मनन करोगे।

मैं पूरे मनुष्य में भरोसा करता हूं। बाहर भी अपना है, भीतर भी अपना है। बाजार भी अपना है और मंदिर भी अपना है। धन भी अपना है और ध्यान भी अपना है। प्रेम में भी डूबो और समाधि को भी मत भूलो। दोनों पंखों को एक साथ सम्हाल लेना है।

– ओशो

बिरहिनी मंदिर दियना बार

प्रवचन - ०२

जागो सखि, बसंत आ गया

ऑनलाइन ओशो नव संन्यास दीक्षा के लिए व्हाट्सएप करे: 08830239288 📿🧑🏻‍💻📿

u/swbodhpramado — 12 days ago
▲ 3 r/Osho

ऑनलाइन ओशो नव संन्यास महोत्सव 📿🎉🙏🏼| रजिस्ट्रेशन अंतिम तारीख 15 अगस्त 2026 ✍🏼

सदगुरु ओशो के नव संन्यासी बनने का सौभाग्य पाए। होश के साथ जोश भरा जीवन नव संन्यास में फलित होता जो संपूर्ण जीवन को पुलकित कर देता है। 🪷

अगर आप या आपके प्रियजन, मित्र या कोई भी ओशो प्रेमी ‘ऑनलाइन नव संन्यास उत्सव’ में सदगुरु ओशो के आशीष में ऑनलाइन संन्यास दीक्षा लेना चाहते है तो रजिस्ट्रेशन करे व्हाट्सएप द्वारा: 08830239288 📿

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख: 15 अगस्त 2026 ✍🏼

अंतिम तारीख के पहले अपना स्थान आरक्षित कर ले। 🙏🏼

🫂 ओशो मैत्री समर्पण (OMS) 🫂

u/swbodhpramado — 13 days ago
▲ 6 r/Osho

मैं चाहता हूं, मेरा संन्यासी ऐसा व्यक्ति हो जिसमें होश के साथ जोश हो..🧡🔥🧡

u/swbodhpramado — 13 days ago
▲ 10 r/Osho

वैज्ञानिक अंधविश्वास भी होता है..😳

u/swbodhpramado — 14 days ago
▲ 5 r/Akola

Why? What happened??? 😯

Not showing anything in our city on Amazon movie booking.

u/swbodhpramado — 15 days ago
▲ 10 r/Osho

Zorba The Buddha - The Only Holy Man; The Only Hope of New Humanity

u/swbodhpramado — 15 days ago
▲ 8 r/Osho

Don't Waste Your Life.. Fulfilled Your Destiny by Knowing Yourself!

u/swbodhpramado — 16 days ago