Hopelessness
यह कड़वा सच है जो कोई खुलकर नहीं कहता|
मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ जो आज हर डॉक्टर जी रहा है।
*एक ऐसे आईसीयू की कहानी जो जल्द ही बंद होने वाला है।*
रात के 2 बजे थे। 60 साल के एक पिता को बड़ा हार्ट अटैक आया। बीकानेर, कोटा, जोधपुर के एक छोटे से 50 बेड के अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट को पता था कि रिस्क 90% है। उसके पास दो रास्ते थे।
- कह दे - "इन्हें जयपुर / अहमदाबाद ले जाओ, मैं हाथ नहीं लगाऊंगा।"
- कह दे - "मैं कोशिश करूंगा, अपना 100% दूंगा।"
उसने दूसरा रास्ता चुना, क्योंकि उसकी शपथ ने उसे यही सिखाया था। उसने स्टेंट डाला, मरीज 2 दिन आईसीयू में रहा, फिर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। दिल बहुत कमजोर था। मरीज नहीं बचा।
और अगले 2 घंटे में जो हुआ, वो भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मार रहा है।
लाठी-डंडों के साथ 40 लोग। लाइव फेसबुक। "डॉक्टर ने मार दिया।" "हॉस्पिटल सीज करो।" "लाइसेंस कैंसिल करो।" "जेल में डालो, फांसी दो।" वो डॉक्टर जो 36 घंटे से सोया नहीं था, जो जान बचाने की कोशिश कर रहा था, उसे पीटा गया, उसके आईसीयू में तोड़फोड़ की गई। पुलिस आई और बोली - "समझौता कर लो डॉक्टर साहब, पैसा दे दो।"
मुआवजा। 20 लाख। 30 लाख। ब्लैकमेल।
मेरे दोस्तों, बताइए - क्या वो डॉक्टर जिंदगी में फिर कभी किसी गंभीर मरीज को छुएगा? कभी नहीं।
और ये हर दिन, हर छोटे शहर में हो रहा है।
हम कॉम्प्लिकेशन, बीमारी, मौत की बात समझते हैं, इसे स्वीकार करते हैं, ये मेडिकल साइंस है। लेकिन समाज ने इसे बना दिया है - "निजी दुश्मनी, बदला, टिट फॉर टैट, पैसे की उगाही।" डॉक्टर सबसे आसान टारगेट है। 🎯
*नतीजा क्या हो रहा है?*
आज कोई भी होनहार एमबीबीएस, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, पीडियाट्रिक इंटेंसिविस्ट नहीं बनना चाहता। कौन 24 घंटे जेल और भीड़ के हमले के डर में जीना चाहेगा?
छोटे और मझोले हॉस्पिटल - जो 75% भारत का इलाज करते हैं, जहाँ 5 लाख की जगह 50,000 में इलाज होता है - वो अपने आईसीयू बंद कर रहे हैं। वो बोर्ड लगा रहे हैं - "गंभीर मरीज भर्ती नहीं किए जाएंगे।"
और भुगत कौन रहा है? डॉक्टर नहीं। आम जनता। वो गरीब किसान, ऑटो वाला, टीचर, जिसके पिता को समय पर स्टेंट नहीं मिलेगा क्योंकि उसे 300 किलोमीटर दूर मेट्रो शहर जाना पड़ेगा।
डॉक्टर भी मर रहे हैं। पिछले 3 साल में कितने युवा कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट की अर्ली कार्डियक अरेस्ट, डिप्रेशन, सुसाइड से मौत हुई? ये प्रेशर अमानवीय है।
मैं समाज के सभी अगुवाओं से अपील करता हूँ - सरपंच, प्रधान, विधायक, सांसद, वकील, पुलिस, मीडिया - आप भीड़ को रोक सकते हैं। आप लोगों को समझा सकते हैं।
अगर आपने रात 2 बजे जान बचाने वाले डॉक्टर के जज्बे को मार दिया, तो भविष्य में बिल्डिंगें होंगी, मशीनें होंगी, पर आपके गंभीर मरीज को छूने वाला कोई नहीं होगा।
*डॉक्टर को बचाइए, तो मरीज बचेगा।*
*डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा रोकना सिर्फ डॉक्टर की मांग नहीं, ये मरीज का अधिकार है।*
#SaveDoctors #SaveHealthcare