How's my poetry (I am so shy about sharing it to anyone i know)
आती जाती थी वो
कोई संदेह नहीं किस और से
गली के उस मोड़ से
मोहल्ले के उस छोर से
सहमी सहमी थी वो
दबी दबी उसकी आवाज़
जाने क्या बकती थी
नदी किनारे थी वो सुखी नदी में पत्थर फेंकती खुश थी वो
सारा दिन यहां से वहां जाने कहा
गुम हो जाया करती थी
गली के उस मोड़ में?
मोहल्ले के उस छोर में?